Monday, August 16, 2010

झारखंड अलग राज्य की माँग –

जैसा कि हमने देखा कि बिरसा आन्दोलन के समय एवं उसके बाद बींसवी सदी के प्रारम्भिक दो-तीन दशकों तक सामाजिक सुधारों, धार्मिक गति-विधियों का जोर झारखंड़ क्षेत्र में रहा। शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए यानि ब्रिटिश-सरकार द्वारा चलाए गए शिक्षा के प्रचार एवं प्रसार के लिए ईशाई मिशनरियों ने काम करना शुरू दिया था। “सुयारन ग्रेजुएट” ने शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए “क्रिसचीयन एसोसिएशन” की स्थापना की थी। आंगलिक मिशन के जे0 बोर्थेलमैन ने 1911-12 में ढाका में आयोजित छात्र संघ का उद्देश्य गरीब ईशाई छात्रों की शिक्षा के लिए राशि जुटाना था। एक और ईशाई नेता ने मुंडा-उराँव एजुकेशन काँग्रेस (यक्षा-सभा) तथा राँची यूनियन ने शहरी आदिवासियों के बीच शिक्षा का प्रसार करने का कार्य किया। 1918 ईस्वी के बाद जब संवैधानिक सुधारों के युग का सूत्रपात हुआ, तथा क्षेत्रिय एवं छोटे हितों की रक्षा तथा संवर्द्धन की मांग जोर पकड़ने लगी, तो शिक्षित ईशाई जनजातियों ने राँची के आंगलिक विषय के कहने पर छोटानागपुर विकास सोसाईटी को संगठित करने में सहायता की थी। ये शिक्षित आदिवासी अधिकत्तर जर्मन एवं आंगलिक मिशनों के छात्र थे।
जे0 बोर्थेलमैन आदिवासी ईशाई थे। इनके बाद स्टुडेन्ट यूनियन छात्र संघ का संचालन जोयले लकड़ा तथा बेदी उराँव ने किया। 1920 ईस्वी में छोटानागपुर उन्नति समाज की स्थापना हुई। “किसान सभा” बनाई गई जिसकी स्थापना थेबले उराँव ने की थी। इसके अलावे कैथोलिक ईशाईयों ने कैथोलिक सभा की स्थापना की थी। इसमें सदस्यता आंगलिक मिशन, लूथेरन मिशन तथा आदिवासियों तक ही सीमित रखा गया था। “छोटानागपुर कैथोलिक सभा” एक सामाजिक, धार्मिक संस्था थी। बाद में इसका राजमैतिक रूप भी उभरा। “छोटानागपुर उन्नति समाज” में भी गैर-आदिवासियों यानि गैर-जनजातियों को सदस्य नहीं बनाया जाता था।
कालान्तर में “छोटानागपुर उन्नति समाज” “किसान सभा” एवं छोटानागपुर कैथेलिक सभा ने मिलकर “आदिवासी महासभा” 1938 में बनाई। इसे पहले इगनियस बेक के नेतृत्व में बनाया गया।
जे0 बोर्थेलमैन ने छोटानागपुर उन्नति समाज के मंच से पहली बार झारखंड अलग राज्य बनाने की माँग को उठाया। आदिवासी बाहूल क्षेत्रों को मिलाकर एक अलग प्रदेश की माँग इस प्रकार 1920 में उठी। इस उन्नति समाज की गतिविधियाँ 1920 से 1938 तक चली, जबतक “”आदिलवासी महासभा” गठित नहीं हो गई।

2 comments:

  1. सर्वप्रथम ब्लॉग जगत में आपका हार्दिक स्वागत.आपकी भाषा व भावना अच्छी है.आगे इसी तरह नई जानकारी देते रहें.

    ReplyDelete